बरखा आयी रे,
चम-चम-चम बिजुरिया चमके
घनन-घनन घन घुमड़ के बरसे,
छम-छम-छम पानी बरसे,
देखो बरखा आयी रे,
सबके मन हरषायी रे।
नदियाॅ नाले सभी भरे हैं,
बाग-बगीचे हरे-भरे हैं,
रंग-बिरंगे फूल खिले हैं,
देख-देख जी हरषाए रे
देखो बरखा आयी रे।
गोरी भींज रही बूॅदों में,
बाट जोहती खड़ी पिया की,
गुजरी बातें यादकर,
कुछ शरमाई,कुछ सकुचाई ,
लज्जा से फिर लाल हुई री,
मन में फिर उल्लास भरी सी,
सतरंगी चुनरी भींज रही है
चूड़ी खन-खन बोले रे
हाथों की मेहंदी महक रही है
पैरों की पायल बोले रे
छम-छम-छम पानी बरसे,
घुमड़-घुमड घन बरसे रे
देखो बरखा आयी रे,
सबके मन हरषायी रे।
नीरा भार्गव
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