गौरया
तस्वीरों के पीछे जाती
बिना हाथ के छोटी चोंच से
जोड़-जोड़ कर नीड़ बनाती
कोमल ,मखमली और प्यारा
उसकी रचना अनुपम होती
फिर उस घर (घोंसला ) में बच्चे आते
चोंच में भरकर दाना लाती
बड़े प्यार से उन्हें खिलाती
जैसे ही वो उड़ना सीखे
गौरया तो खुश हो जाती
हर्षित अहसास में
वियोग की वेदना को
कुछ इस प्रकार छुपाती
कि,फिर अगले ही दिन से
एक नए होंसले के संग
नई दुनिया बसाने को
प्रतिदिन तिनका लेकर आती
जोड़-जोड़ कर नीड़ बनाती

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