Friday, 21 July 2017




 बरखा ! तुम हो रानी

बरखा ! तुम हो रानी
हाँ ! तुम सचमुच हो रानी |
आने से तुम्हारे ,हो जाती है                                            
प्रकृति हरी-भरी , मानो
 नहा-धोकर हों सब तैयार ,
करने को तुम्हारी अगवानी ,
बरखा ! तुम तो हो रानी |
तुम्हारे आने से ठीक पहले
नीले अम्बर पर,बादल काले
छा जाते हैं ,कड़के बिजली ऐसे
मानो तोपों की देती तुम्हें सलामी ,
बरखा ! तुम तो हो रानी |
तुम देती हो जीवन,नवांकुरों को
भरती हो प्राण,निष्प्राण पड़े 
बीजों में ,बनकर तरु वे 
फैलाते हैं धरा पर हरियाली
बरखा ! तुम तो हो रानी |
बादल देते हैं ताल , थिरकती हो
 बांधे मोती सी बूंदों के घुंघरू  
हो बैचेन मिलाती हो सुरताल
देख तुम्हें हर्षाए मन मयूर
नाचे मोर पंख फैला बिखेरे ,
इन्द्र्धनुषी छठा निराली,
बरखा ! तुम  तो हो रानी
तुम आती हो लाती हो
महकता सावन ,भरती हो उमंग
प्रफुल्लित हो गाती गीत नई नवेली
सतरंगी लहरिया पहने ,
झूलती झूला  ,करती तेरी
बूंदों संग अठखेली |
बरखा ! तुम  तो हो रानी
फ़ैल जाती चहुँ ओर घेवर की महक
पर, धधकती है ज्वाला ह्रदय में ,
जब तके पिया की राह अकेली ,
बाहर गर्जन हो मेघों का ,
भीतर तडपन मचे जोर की |
बरखा ! तुम  तो हो रानी
 बरखा ! अब सुन लो एक
विनती हमारी ,मत करना प्रलय ,
करना मत तांडव, हो न विध्वंस
न टूटे सीमाओं के बांध
न छूटे आँगन किसी का ,
न  हो कोई देहरी खाली |
आओ तो मन भर कर देना |
जाओ जब ,आने की आस बंधाना
जोहेंगे हम बाट तुम्हारी
बरखा ! तुम तो हो रानी